शिवराज ने चारों तरफ अपनी मोटी लूट के लिए ना भर्तियों की ना पदोन्नतियां
सड़कें खराब हो गई, बांध फूट, टूट गए, पुल टूट गए। बेशक भारी भ्रष्टाचार हुआ। पर केवल भ्रष्टाचार कह देने से काम नहीं चलेगा। लगातार सन 2000 से इंजीनियरिंग, लिपिक वर्गीय तकनीकी आदि के कर्मचारी अधिकारी खत्म होते जा रहे हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर स्टाफ की भर्ती, पूरी तरह से दैनिक वेतन भोगी स्तर कर्मचारियों पर चल रही है। फिर जंगली भूखे भेडियों के झुंड को सत्ता क्या मिली? अपने बाप की जागीर समझ कर बैठ शिवराज ने चारों तरफ अपनी मोटी लूट के लिए ना भर्तियों की ना पदोन्नतियां दी। काम 3 गुना पर जरूरत का 30% चपरासी से लेकर प्रमुख अभियंता, संचालक, आयुक्तों तक सब की हर विभाग में कमी, के साथ हर अधिकारियों व कर्मचारियों को २से ५ तक पदों पर प्रभार वसूली कर प्रभार सौंपा देने के साथ-साथ, फिर चुनाव ड्यूटी, गणना, मतदाता सूची बनाने, जांचने में जिलों के जालसाज जिलाधिकारियों को नाम व दाम की मोटी कमाई के लिये इन सभी विभागों के कर्मचारियों अधिकारियों को, अभी सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को, बात बात में डांट, धौंस, निलंबन, दो साल की धमकियां देकर कार्यालयों में कार्य ठप्प करवा, उनके यात्रा, दैनिक भत्तों व मानदेय हड़प कर जाने वाले ये जिलाधीशों को नहीं समझ आता, कि शासन को लिखें, स्टाफ की भर्ती करवाने, पर उसे इन सबसे मतलब नहीं। उसे तो हर दिन करोड़ों की काली कमाई अवैध खनन, पंजीयन, परिवहन, आबकारी, भू अंतरण, कालोनाइजरों से, निजी नर्सिंग होम्स, चिकित्सालयों, विद्यालयों, महाविद्यालयों से, अवैध फेक्ट्रीयों से, कृषि, उद्यानिकी, शहरीकरण से, ग्रामीण विकास, आदिम जनजाति से, खाद्य व औषधि से, नागरिक खाद्य आपूर्ति से, लोनिवि, जल संसाधन, लोस्वायां, गृह निर्माण मंडल, पुलिस, प्रदूषण मंडल, वाणिज्य, महिला बाल विकास, सामाजिक न्याय, नगर निगमों, पालिकाओं, प्राधिकरणों, पंचायत, स्वास्थ, वन, कोषालयों, विद्युत कं. आदि सबसे, कैसे भी करो कहीं से भी लाओ। फिर किसी को मतलब नहीं। मुख्यमंत्री शिवराज तो ईवीएम को जालसाजी से 16 साल से कलेक्टरों को लूट की पूरी छूट देकर, अपना हिस्सा वसूल कर चुनाव के समय जीतने का खेल से पूरा कर लेता है। उसको केवल लूट से मतलब है। अब यदि जल संसाधन संभाग धार को ही लें जहां पर कारम बांध कांड हुआ। तो वहां सहायक यंत्री निनामा को कार्यपालन यंत्री का मोटा प्रभार लेकर प्रभार दिया गया। उसकी सेवाओं से खुश होकर उसे छिंदवाड़ा का अधीक्षण यंत्री का प्रभार भी दे दिया गया। भोपाल मुख्यालय में बांधों की सुरक्षा का भी प्रभार है। अब एक सहायक यंत्री स्तर का व्यक्ति कितना काम कर पाएगा? और क्या अपने काम के साथ न्याय व देखरेख कर सकेगा? यही हाल हर विभाग में है कहीं तो दो दो तीन तीन पद ऊपर बैठाकर पूरे प्रदेश में काम करवाया जा रहा है। मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग में पौधारोपणी प्रभारी जो तृतीय श्रेणी का पद है। मोटा प्रभार ले उसे प्रथम श्रेणी पद का उपसंचालक बनाकर प्रदेश के 60 से ज्यादा उपसंचालक स्तर के कार्यालयों में पदस्थ कर काम लिया जा रहा है।‌किस लिए केवल भ्रष्टाचार से लूट के लिये। 70% कर्मचारियों अधिकारियों को दिए जाने वाले वेतन भत्तों व अन्य सुविधाओं का प्रतिमाह हजारों करोड़ का वेतन का पैसा बचाया जा रहा है। लगातार एसजीएसटी, आबकारी, पेट्रोल डीजल गैस पर वेट, पंजीयन, खनन के साथ अन्य स्रोतों से हजारों करोड़ प्रतिमाह की आय होने के बाद में भी पैसा सूअर मोदी की तरह शिवराज भी अपने मित्रों पर खर्च कर मोटा कमीशन वसूल रहा है। हजारों करोड़ की मेट्रो ट्रेन चाहिए क्योंकि उसमें हजारों करोड़ का कमीशन भी है। पर जनता व विपक्ष नपुंसकों की तरह जनता के सामने सच्चाई बयान करने लाने धरने आंदोलन कर आवाज उठाने की अपेक्षा सब अपनी लूट की बारी आने के इंतजार में चुप बैठे हैं। प्रसूति लेखक एवं निवेदक प्रवीण अजमेरा समय माया समाचार पत्र इंदौर
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