स्वच्छता का पाखंड, बदले में विषैली प्राणवायु जनता को दे रही बीमारियां और अकाल मृत्यु
इंदौर नगर की मुख्य सड़कों पर ही सफाई दिखाई देती है। जबकि अंदर की बसाहटों में, गृह निर्माण मंडल की, विकास प्राधिकरण की, बड़े नेताओं, भू माफिया की कॉलोनियों की सड़कों और मकानों की बैकलाइन में न केवल कचरा भरा रहता है, इस निगम में वर्षों से कुंडली मारे बैठे डकैतों के शहर में पिछले 20 वर्षों में नालिया बिछाने के नाम पर, एडीबी, विश्व बैंक का, जेएनएनयूआरएम, खुले बाजार से बेचे गये बांड का रुु हजार करोड़ से ज्यादा डकार गए, परंतु सड़कों के किनारे व मकानों की पिछाड़ूू में नालिया सीवर लाइन, स्टार्म लाइन, आजादी के 70 साल बाद भी अभी तक ढंग से नहीं बनाई जा सकती इसकी आड़ में पिछले 40 साल से खोदने, फोड़ने, बनाने के तांडव में जनता परेशान भी हो रही है। फिर भी गंदा पानी बदबु मारता रहता है। बरसात में तो इंदौर मुख्य मार्गों पर भी पानी भर जाने के कारण दर्शनीय और नाव चलाने लायक हो जाता है। फिर भी 3 बार सफाई का पुरस्कार बांटने वाले और लेने वाले दोनों ही जनधन की लूट के साझेदार है। हर नगर की जनता को भ्रमित करने सफाई में नंबर वन है। इस सफाई की आड़ में, बड़ी पूंजीपति कंपनियों टाटा, महिंद्रा, लीलैंड, आदि के जिसके हजारों करोड़ के, 2लाख छोटे बड़े ट्रकों की बिक्री अनावश्यक रूप से देश की 6 लाख गांव से 20 बड़े महानगरों 560 नगरों में कर दी गई। खरीदी का यह खेल लाखों करोड़ों रुपए के इस खेल मैं इंदौर में कमीशन में के रूप में सभी बड़े अधिकारियों, आयुक्त, महापौर और समीत‍ि‍यों के पार्षदों को कारेें मुफ्त में कमीशन में ही मिल गई। जबकि शहर में पिछले साल भर से चारों तरफ व‍िषैली बदबू जिसमें मिथेन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन मोनो व डाइऑक्साइड, आद‍ि‍ जहरीली गैस है। जो शाम को 4- 5 बजे से लेकर रात 9-10 बजे तक जनता का दम घोंट रही है। इंदौर में। जो कि अंबेडकर नेहरू नगर मैं यह बदबूू साल भर से महसूस की जा रही है। जिस के संबंध में मैंने 13 नवंबर 19 को जब यह बदबू पत्रकार कॉलोनी, से पलासिया चौराहे ब एमआई थाने तक आती हुई महसूस की, तो मैंने आसपास के लोगों से पूछ कर यह धारणा पुष्ट की, यह बदबू ना केवल सभी को आ रही है वरण सब परेशान भी हो रहे हैं। तब तत्काल अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रदुषण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी गुप्ता को फोन लगाया परंतु अहंकारी नेे भी फोन नहीं उठाया। तो दूसरों को लगाया, पूछने पर मालूम पड़ा गुप्ता किसी का फोन नहीं उठाता। क्योंकि उसने सारे मंत्रियों को पैसा बांट दिया है। तो बदबू के संबंध में उनको बताया। बताया कर्मचारियों को और प्रशासन को आगाह किया था जो 16 नव के पत्रिका में भी छपा। परंतु पत्रिका ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार लैंड फिल गैसों की कान्हा और सरस्वती नदी की सफाई के कारण बताया दूसरी तरफ ओपी जोशी ने आधा सच बताया कि यह बदबू लंबे समय से दबे कचरे की जोकि शहर केे बीच में से बहने वाले नालों को कचरे से भराई और पाटने के कारण उत्पन्न हो रही है। जबकि सच की खोज जो मेरे सामने आई बदबू आने के कारणों का अध्ययन का निष्कर्ष यह है, कि घोर धूर्त कमीशन खोर नगर निगम के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने मिलकर मोटा धन हड़पने अधिकांश मोहल्लों में, खाली पड़ी बगीचे की जमीनों खेलकूद के मैदानों खाली पड़े प्लाटों में अवैध रूप से कब्जा कर, नालों के आस-पास जो कचरा डंपिंग स्टेशन बनवाए हैं। जिन पर पिछले 5 सालों में लगभग 500 करोड़ से ज्यादा स्वच्छता के नाम लगभग 300 करोड़ हजम कर बर्बाद कर दिया गया। जिनमें सारा कचरा इकट्ठा कर डंप और उसकी नष्ट करने की प्रक्रिया आदि किया जा रहा है। जैसे न्यू पलासिया के नाले के किनारे दबंग दुनिया के बाजू में एक डंपिंग स्टेशन बना हुआ है उसके आसपास चारों तरफ 2 किलोमीटर में बहुत बदबू फैल रही है दूसरा स्टेशन पंचम की फैल में नाले के किनारे, तीसरा स्टेशन एमवाई के पीछे हंस बस सर्विस के पास राज होटल के बाजू में ईसाई कब्रिस्तान के प्लॉटों पर बनाया गया। ऐसे सैकड़ों स्टेशन पूरे इंदौर शहर में बनाए गए जो शाम को 4-5 बजे से और रात में 9-10 बजे तक दिन ढलने से रात गहराने तक बदबू फैला कर 15 लाख की आबादी से ज्यादा लोगों को दम घोंट रहे हैं। सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने पर वहां बैठी गिद्धों की फौज जिसमें पार्षद महापौर निगमायुक्त पूर्व में मनीष सिंह से लेकर वर्तमान का आशीष सिंह और सभी सहायक उपायुक्त व अन्य अधिकारी व कर्मचारी एक लाइन की जानकारी देना पसंद नहीं करते और आवेदकों को भटकाया और परेशान किया करते हैं। क्योंकि वह हर कदम ₹1 का काम 10 से ₹20 में होता है सब डकैतों की फौज को लूटना और खाना है कोई सुनियोजित शहर का विकास कचरा डंपिंग सफाई कर्म नहीं है बस जहां जगह मिले वहां पर कचरा डंपिंग स्टेशन खाद बनाने के कार्यक्रम के नाम पर पैसा निकालो और हजम करो मेरे आजू-बाजू में एक संजय पवन अंबेडकर गार्डन और धारकर गार्डन है। इन तीनों में भी लाखों रुपए खर्च कर खाद बनाने के टांके और सेठ बनाया गया पर उसमें आज तक किसी को काम करते हुए और बगीचों का कचरा डालते हो नहीं देखा गया जहां बगीचे के कचरे चढ़ाकर खाद बनाई जा सके और ऐसा हुआ भी नहीं बस बना बना कर खड़े करो पैसा हजम करो सीमेंट की सड़कों पर डामर की सड़क में डालो डामर की सड़कों पर सीमेंट की सड़कें डालो। मुफ्त वाईफाई इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए लगभग 200 करोड रुपए से ज्यादा के हर चौराहे पर खंबे खड़े किए गए 5 साल गुजर जाने के बाद में भी शहर को मुफ्त वाईफाई इंटरनेट की सुविधा नहीं मिली और उसमें लगभग 50 से 100 करोड़ का मोटा कमीशन हजम कर लिया गया इन हरामखोरों, महापौर मालिनी गौर से लेकर सभी पार्षदों निगम आयुक्तों उपायुक्तों सहायक आयुक्तों लेखा अधिकारी, बाबुओं आदि पर कोई भी लोकायुक्त की कार्रवाई इतने वर्षों बाद क्यो नहीँ हुई। बेशक लोकायुक्त के सुकरों को भी न‍ि‍गम से महीना पहुंचता है़। इसलिए वह भी सब चुप रहते हैं। शिकायतें ढेर पहुंचती हैं।सब मिल बांट कर खा रहे हैं। इसलिए कोई चिल्ला नहीं रहे हैं। जनता कल की मरते आज मरे इन्हें बस लूट से काम है।सफाई के, सड़क बनाने के, पानी पिलाने के नाम पर लूट, हर काम में, हर टेंडर में, खरीदी, निर्माण़, मरम्मत, ठेकेदारी, सब में कदम हर कदम लूट का तांडव, सुविधाओं के नाम पर अपने अपने बालों को अंधों की रेवड़ी की तरह बांट दी जाती है। जनता बेचारी मरने और लुुटने के लिए ही पैदा हुई है। बेलदार करोड़पति, बाबू करोड़पति, इंजीनियर हरभजन ने तो जमे रहने अय्याश नेताओं मंत्रियों आयुक्तों को लाखों रुपए की सुरासुंदरी की सेवाएं वर्षों से उपलब्ध करवाई है। तो कमाई अरबों में हुई। तभी वह 25 साल से यहां जमा रहा और जब गले में लड़कियां अटक कर उसे बुरी तरह से निचोड़ने लगी तो वह चिल्लाया। अन्यथा 20-22 सालों से खेल सबको सुरासुंदरी की सेवाएं उपलब्ध करवाने के कारण सभी अधिकारी नेता मंत्री कर्मचारी खुश थे। सुविधाओं का उपभोग कर ऐसे सैकड़ों गिद्धों को ना केवल इंदौर में बल्कि पूरे प्रदेश के नगर निगम पालिकाओं में पाल रहे हैं सब सेवाएं महान घोर भूतपूर्व का मुख्यमंत्री दिग्गी दानव लेकर पालता था और अब उसका बेटा राजवर्धन सिंह उपभोग कर रहा है इसलिए वह सूअर भी ऐसे गिद्धों का स्थानांतरण नहीं कर रहा है। आखिर बाप के पद चिन्हों पर ही तो चलेगा। उसे सब से दोस्ती रख कर लूटना है और लुटाना है ताकि आने वाले कल में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने की चाहत तो है। ऐसे सैकड़ों कर्मचारी अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर इंदौर में अजगर की तरह कुंडली मारकर जमे हुए हैं। और इन कुकर्मों से जनता को मौत के मुंह में धकेल कर मोटा पैसा हजम कर रहे हैं। यहां पैसा हजम करो का 1 सूत्री कार्यक्रम सफाई कर्मियों से लेकर निगम आयुक्त महापौर तक का है। कल रहे न रहे। तो फिर इनकी निकंमी आपराधिक प्रवृत्ति की औलादे क्या करेंगी। इंदौर प्रदूषण मंडल में बैठा हुआ क्षेत्रीय अधिकारी गुप्ता यह सूकर भी फोन नहीं उठाता। क्योंकि यहां आए नए कांग्रेसी भूखे गिद्धों सज्जन वर्मा, तुलसी सिलावट, बाला बच्चन सबको टुकड़े डालकर पाल रहा है।वह। इसलिए जिसको जो करना है। वह करो। शहर को जहरीली वायु के प्रदूषण से मारना हो तो मारो। जल स्त्रोतों में फैक्ट्रियों से निकले तेजाबी कचरे को जो पीथमपुर, देवास व प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान से मध्यप्रदेश में लाया जा कर जल स्रोतों में भूमि में, नदियों, नालों, पाइप लाइनों में छोड़ा जाकर दूषित पानी से मारना हो तो मारो। बस पैसा बांटो जो करना है। सब करो।यहां की भेड़ों का झुंड, जनता, कुछ नहीं बोलेगी। समाचार पत्रों के बिकाऊ भड़वे भास्कर पत्रिका नई दुनिया नवभारत यह सभी शौकीन मिजाज पैसे के ही हैं। सच जानकर भी सच नहीं लिखेंगे सभी भू माफिया, कालोनी माफिया, अपराधिक प्रवृत्ति के नेता अधिकारियों मंत्रियों के संरक्षणदाता और उनसे मोटी कमाई करने वाले हैं। जनता चिल्लाएगी, हल्ला मचाएगी, तो नेता, मंत्रियों, अधिकारियों, समाचार पत्र वालों की कमाई ही करवाएगी।
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